इस विपदा की कठिन घड़ी में, जगे चेतना सबके भीतर | आओ मिलकर दीप जलाएं, तेरे घर पर मेरे घर पर | दीप जले तो मिटे अंधियारा, बिच भवर में दिखे किनारा | बढे मनोबल सबका सत्वर, तेरे घर पर मेरे घर पर | थका विश्व है विपदा लड़कर, करे प्रार्थना हाथ जोड़कर | क्षेम मंगल हो हर प्राणी का, तेरे घर पर मेरे घर पर | समूह चेतना जब जगे देश में, जीत हमारी निश्चित करने , सृष्टि भी तब होगी तत्पर, तेरे घर पर मेरे घर |
